सरगुजा ओलंपिक के आयोजन पर उठे सवाल, प्रचार-प्रसार की कमी से कम संख्या में पहुंचे खिलाड़ी
खिलाड़ियों में दिखा उत्साह, लेकिन व्यवस्था और खेलों के चयन को लेकर उठे सवाल; अधिकारियों की व्यवस्था पर भी चर्चा
खड़गवां, । ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक 2026-27 की विकासखंड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में अव्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खड़गवां के मिनी स्टेडियम में 12 एवं 13 अक्टूबर को आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रचार-प्रसार की कमी के कारण अपेक्षाकृत कम संख्या में खिलाड़ियों के पहुंचने की बात सामने आई है। वहीं, प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों के बीच खेल को लेकर उत्साह जरूर दिखाई दिया, लेकिन आयोजन की तैयारियों और खिलाड़ियों के लिए की गई व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रतियोगिता के बैनर के अनुसार, इसमें एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, फुटबॉल, बैडमिंटन सहित अन्य खेलों को शामिल किया गया था। हालांकि, आयोजन के उद्देश्य और खेलों की व्यापकता को देखते हुए जिस स्तर पर खिलाड़ियों की भागीदारी की उम्मीद थी, उस अनुरूप उपस्थिति नहीं दिखाई देने की बात कही जा रही है।
प्रचार-प्रसार की कमी से खिलाड़ियों की भागीदारी पर असर!
ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनमें बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें समय पर प्रतियोगिताओं की जानकारी नहीं मिल पाती। सरगुजा ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार, ग्राम पंचायत स्तर पर सूचना, स्कूलों एवं महाविद्यालयों के माध्यम से जानकारी और खेल प्रशिक्षकों के जरिए खिलाड़ियों को आमंत्रित करना जरूरी है।
खड़गवां विकासखंड में प्रतियोगिता को लेकर पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। इसके कारण कई संभावित खिलाड़ी आयोजन से अनजान रह गए या प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए नहीं पहुंच सके। यदि आयोजन से पहले व्यापक स्तर पर सूचना दी जाती, तो ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक संख्या में खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पहुंच सकते थे।
खिलाड़ियों में उत्साह, लेकिन व्यवस्थाओं पर सवाल
प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों में खेल के प्रति उत्साह देखने को मिला। सीमित संख्या में पहुंचने के बावजूद खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में रुचि दिखाई। खेल प्रतियोगिताओं का मूल उद्देश्य भी यही है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध हो।
लेकिन सवाल यह है कि जब खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए इतने बड़े आयोजन की योजना बनाई जाती है, तो उनकी सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान क्यों नहीं दिया जाता? खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए आयोजन से पहले तैयारी, समुचित जानकारी और मैदान में आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
आयोजन में शामिल खिलाड़ियों के लिए भोजन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। लंच की व्यवस्था सभी खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त नहीं थी और कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों को ही भोजन मिल पाया। पर्याप्त भोजन की व्यवस्था होते-होते शाम हो गई जिसे कई खिलाड़ियों को ही खाली हाथ वापस लौटना पड़ा,यदि यह स्थिति सही है, तो यह आयोजन प्रबंधन के लिए गंभीर सवाल है।
खेल प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में उनके लिए भोजन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना आयोजन की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है। खिलाड़ियों को समान रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि किसी भी खिलाड़ी को उपेक्षा का सामना न करना पड़े।
वहीं आयोजन स्थल पर अधिकारियों के लिए बुनियादी व्यवस्थाएं की गई थीं, जबकि खिलाड़ियों की सुविधाओं को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई दी। हालांकि, इस संबंध में आयोजन समिति या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
चुनिंदा खेलों के आयोजन को लेकर भी चर्चा
सरगुजा ओलंपिक का उद्देश्य अधिक से अधिक खेल प्रतिभाओं को अवसर देना और ग्रामीण युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ना है। ऐसे में प्रतियोगिता में शामिल खेलों और उनके संचालन को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी है।
आयोजन को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि बैनर पर कई खेलों का उल्लेख होने के बावजूद मैदान में सभी खेलों का आयोजन किस स्तर पर और किस प्रकार किया गया। यदि कुछ खेलों तक ही प्रतियोगिता सीमित रही, तो इसकी वजह स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।
खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए बेहतर प्रबंधन जरूरी
सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। इसके लिए केवल प्रतियोगिता आयोजित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों तक सूचना पहुंचाना, पर्याप्त संख्या में प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, निष्पक्ष प्रतियोगिताएं कराना और सभी के लिए समान सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
खड़गवां में आयोजित प्रतियोगिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब संबंधित अधिकारियों और आयोजन समिति की जिम्मेदारी है कि वे प्रचार-प्रसार, खिलाड़ियों की उपस्थिति, भोजन व्यवस्था और खेलों के संचालन की स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही, भविष्य में ऐसी कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि ग्रामीण अंचल के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सके।
अब सवाल यह है कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित सरगुजा ओलंपिक में यदि प्रचार-प्रसार और बुनियादी व्यवस्थाओं में कमी रही, तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?



